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खुद से खुद की जब सही पहचान होने लगे
वीराने में हमें अब एक रूहानी महफ़िल लगे
खुद से खुद की जब सही बातचीत होने लगे
अकेलेपन में हमें अब एक जुगलबंदी लगे
ज्यादातर लोग जब कामयाबी पे जलने लगे
महफिल में हमें अब कुछ कम ही लोग सयाने लगे
लोगों की क्या वो जिंदादिली नहीं समझते
खुद से मोहब्बत ही हमें अब इबादत लगे ..
और चाहे जब हो , या तब हो , या अब हो …
हमे बस वर्तमान पल में रहना ही सच्ची जन्नत लगे