बेबसी से एक लड़का बैठ गया था एक लडकी आई वह उस लड़के को नहीं जानती थी बेबसी को जानती थी उस लड़की ने उसकी तरफ हाथ बढ़ाया लड़का लड़की को नहीं जानता था पर हाथ बढ़ाने को जानता था उसने हाथ बढ़ाया और खड़ा हुआ फिर दोनों साथ चले दोनों एक दूसरे को नहीं जानते थे पर साथ चलने को जानते थे।।
फिर वह दोनों और आगे बढ़े आगे कई तूफान आए उनके साथ होने पर दुनिया की नजर लगी कभी फिर भरोसा कम हुआ कभी फिर स्वार्थ ने जगह ली पर दोनों अब माफ करना जानते थे पर दोनों अब धीरज रखना जानते थे इतना कुछ पहले से सह लिया है दोनों ने की अब दोनों बस हर पल जीवन जीना जानते है बस हर पल खिलना खुलना जानते है
(सच है भगवान खुद नहीं आता पर साथ चलने के लिए फरिश्ते भेजता है )