धुनि (Sacred Fire)
भूतकाल से भविष्य का हिसाब जोड़ना अब संभव नहीं,
अंदर जल रही यह मुक्ति की धुनी अब रुकने वाली नहीं
कैसे कहूँ तुम्हें? दोबारा वैसा दर्दी लिखना अब संभव नहीं।
तेरी घायल यादों का पूँजीखाता अब शेष नहीं,
इस कर्म के खाते में गलती हमारी वैसे कोई भी नहीं,
इस धूनी में दोबारा वैसा दर्द लेकर लिखना संभव नहीं।
जो मिला, वह हमारे हाथ में नहीं
विछोह भी हमारे हाथ में नहीं,
गलतियों को माफ करे तब कोई बंधन रहा शेष नहीं,
अगर फिर मिले हम तो शून्य बनकर, बाकी बस कुछ है नहीं।
क्योंकि ।…
इस जलती धूनी में, जो लिखने वाला था,
वह विलीन होगा, वो भी अब बचेगा नहीं 🔥
In english