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अब कसूर ये है कि उनकी आदत हो गई है हमें,
हर धड़कन में बस उनकी राहत हो गई है हमें।
कल तक अनजान थे, राहें भी जुदा थीं हमारी,
आज उनकी मुस्कानों की चाहत हो गई है हमें।
लफ़्ज़ कम पड़ते हैं, मगर एहसास बयां कर देता है,
कि उनसे बस बात होने की ज़रूरत सी हो गई है हमें।
अब जुदाई का ख़याल भी चुभने लगता है दिल को,
शायद मोहब्बत से बढ़कर मोहब्बत हो गई है हमें।
अब कसूर ये है कि उनकी आदत हो गई है हमें,
हर धड़कन में बस उनकी राहत हो गई है हमें।