रहम
बचपन में देखा हुआ मौत का कुआ था झुठा
आज तो असल में मौत का समंदर दिख रहा है
ईस मौत को ईतनी क्या जलदबाजी है
जो लेने लाखों जीव और देने हमें लाशे आई है
ऐ मौत…
तेरा कोई तो कानुन या नियम होगा ना
तेरा कोई तो धर्म मजहब तो होगा ना
रहम नहीं करना ऐसा कौन सिखाता है
बस ईस बार हमारी गलती तुम बक्ष दो ना
ऐसै आधे अधुरे सपनें छोडकर किसीको न लेकर जा
ना अपना पराया छोटा बडा किसिको भी रूसवा न कर जा
ऐ मौत बोल तुझे जो जो गलत लगता है वह मसला कर
मनुष्य के बनाये सारे भेद ऐसे मसलकर ना मिंटा जा
ऐ मौत…
बस समय दों , बस रहम करों
यहां सच्चाई से जिनेवाले लोग भी बहुत है
यहां मासुम ईश्वर पर भरोसा रखनेवाले भी बहुत है
बस ईस बार हमारी गलती तुम बक्ष दो ना
बस थोडा रहम तो करोना….
Bhai heart touching thought